कुरान - 5:70 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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لَقَدۡ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَ بَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ وَأَرۡسَلۡنَآ إِلَيۡهِمۡ رُسُلٗاۖ كُلَّمَا جَآءَهُمۡ رَسُولُۢ بِمَا لَا تَهۡوَىٰٓ أَنفُسُهُمۡ فَرِيقٗا كَذَّبُواْ وَفَرِيقٗا يَقۡتُلُونَ

Transliteration: (Laqad akhaznaa meesaaqa Banee Israaa'eela wa arsalnaaa ilaihim Rusulan kullamaa jaaa'ahum Rasoolum bimaa laa tahwaaa anfusuhum fareeqan kazzaboo wa fareeqany yaqtuloon)

"बेशक, हमने बनी इस्राईल से अहद (वादा) लिया था, और हमने उनकी तरफ रसूल भेजे। जब कभी उनके पास कोई रसूल ऐसी बात लेकर आया जो उनके दिलों को पसंद नहीं थी, तो उनमें से कुछ को उन्होंने झुठला दिया, और कुछ को उन्होंने क़त्ल कर डाला [211]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 70 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 70 की तफ़्सीर

 

✅ [211] नबियों की तक़ज़ीब और शहादत की ज़िम्मेदारी:

  • यहूद और नसारा दोनों ने अपने-अपने दौर के नबियों के पैग़ाम को या तो बदला, झुठलाया, या इनकार किया।
  • लेकिन यहूद वह क़ौम है जिन्होंने कई नबियों को क़त्ल तक कर दिया, जिनमें हज़रत ज़करिया और हज़रत याह्या (अलैहिमुस्सलाम) जैसे बड़े नबी शामिल हैं।
  • यह बात इस्लामी अक़ीदे से मेल खाती है कि कोई नबी काफ़िरों के हाथों जिहाद के मैदान में शहीद नहीं हुआ।
  • नबियों की यह शहादत उनकी अपनी क़ौम के हाथों हुई, जो इस्लामी नज़रिया में अल्लाह की नुसरत और उसके रसूलों की फतह की आयतों से कोई तज़ाद (टकराव) नहीं रखती, जैसे:
    "अल्लाह ने ठान लिया है कि मैं और मेरे रसूल ही ग़ालिब रहेंगे"

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