कुरान - 5:71 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

71
وَحَسِبُوٓاْ أَلَّا تَكُونَ فِتۡنَةٞ فَعَمُواْ وَصَمُّواْ ثُمَّ تَابَ ٱللَّهُ عَلَيۡهِمۡ ثُمَّ عَمُواْ وَصَمُّواْ كَثِيرٞ مِّنۡهُمۡۚ وَٱللَّهُ بَصِيرُۢ بِمَا يَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Wa hasibooo allaa takoona fitnatun fa'amoo wa sammoo summa taabal laahu 'alaihim summa 'amoo wa sammoo kaseerum minhum; wallaahu baseerum bimaa ya'maloon)

"और उन्होंने यह गुमान किया कि उन पर कोई आज़माइश नहीं आएगी। तो वे अंधे और बहरे बन गए। फिर अल्लाह ने उनकी तौबा क़ुबूल की [212]; लेकिन उनमें से अधिकतर फिर से अंधे और बहरे बन गए [213]। और अल्लाह जो कुछ वे करते हैं, उसे ख़ूब देखने वाला है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 71 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 71 की तफ़्सीर

 

✅ [212] तौबा की क़ुबूलियत:

  • अल्लाह ने बनी इस्राईल की एक नई नस्ल की तौबा क़ुबूल की, जिन्हें बख़्त नस्र जैसे ज़ालिम बादशाह के ज़ुल्म से नजात मिली थी।
  • बख़्त नस्र ने उन्हें बहुत ज़िल्लत दी थी, लेकिन बाद में एक फ़ारसी बादशाह ने उसे हरा कर इन यहूदियों को आज़ाद किया।
  • अल्लाह ने उन बच्चों की तौबा क़ुबूल की, जिनके बाप-दादा नबियों के क़ातिल थे।
  • मगर जिन लोगों ने नबियों को शहीद किया था, उनकी तौबा क़ुबूल नहीं हुई, और शरीअत में यह क़ायदा है कि नबियों की तौहीन करने वालों की तौबा मंज़ूर नहीं होती।

✅ [213] दोबारा इनकार और गुमराही:

  • बाद में इन्हीं में से अधिकतर लोग फिर से कुफ्र में पड़ गए, और अंधे-बहरे बन गए।
  • इसका इशारा इस बात की तरफ़ है कि उन्होंने हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को क़त्ल करने का इरादा किया, हालांकि वो इसमें नाकाम रहे।
  • “अधिकतर” शब्द से यह साबित होता है कि सारे लोग नहीं, बल्कि एक बड़ी तादाद दोबारा गुमराह हो गई।
  • यह लफ़्ज़ी नुक्ता इस बात को स्पष्ट करता है कि पहले कुछ की तौबा क़ुबूल हुई, लेकिन बाद में बहुत से लोग फिर से कुफ्र और ज़िद में पड़ गए।

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