कुरान - 5:85 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

85
فَأَثَٰبَهُمُ ٱللَّهُ بِمَا قَالُواْ جَنَّـٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ وَذَٰلِكَ جَزَآءُ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

Transliteration: (Fa asaabahumul laahu bimaa qaaloo Jannnaatin tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaa; wa zaalika jazaaa'ul muhsineen)

तो अल्लाह ने उन्हें उनके इस क़ौल के बदले इनाम दिया — ऐसे बाग़ात जिनके नीचे नहरें बहती हैं, जिनमें वे हमेशा रहेंगे। और यही है नेक अमल करने वालों का इनाम [239]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 85 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 85 की तफ़्सीर

✅ [239] अल्लाह की राह में सच्चा क़ौल — जन्नत का कारण

सच्चे और नेक इरादे से कहे गए शब्द भी अल्लाह की नज़र में क़ीमती होते हैं और उनके बदले में हमेशा की जन्नत अता की जाती है।

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