Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo laa tuharrimoo taiyibaati maaa ahallal laahu lakum wa laa ta'tadooo; innal laaha laa yuhibbul mu'tadeen)
यह आयत सिखाती है कि इंसान को उन चीज़ों को हराम नहीं कहना चाहिए जिन्हें अल्लाह ने हलाल ठहराया है — जैसे कि फातिहा में इस्तेमाल होने वाले खाने या रोज़मर्रा की नेमतें जो अल्लाह ने बख़्शी हैं। अगर कोई क़सम खा ले कि वह किसी हलाल चीज़ से बचेगा, तो वह चीज़ हराम नहीं हो जाती। इस्लाम संतुलन का दीन है, ज़रूरत से ज़्यादा रोक-टोक का नहीं।
यह आयत उन सहाबा के बारे में उतरी जिन्होंने एक भावुक बयान सुनकर दुनियावी आरामों से दूरी का इरादा किया — जैसे हमेशा रोज़ा रखना, गोशीनशीन हो जाना, गोश्त न खाना, और नरम बिस्तर छोड़ देना। अल्लाह ने इस पर सुधार किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि तसव्वुफ़ का मतलब हलाल चीज़ों को छोड़ना नहीं, बल्कि हराम से बचते हुए ज़िम्मेदार ज़िंदगी जीना है।
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