Transliteration: (Wa kuloo mimmaa razaqakumul laahu halaalan taiyibaa; wattaqul laahallazeee antum bihee mu'minoon)
हलाल वह चीज़ है जो हराम नहीं हो सकती, जबकि पाक वह है जो गंदी या नापाक नहीं होती। जैसे लार या बलग़म शरीअत में नाजायज़ नहीं हैं, मगर वे ना साफ़ हैं ना रुचिकर। इसके उलट, स्वादिष्ट, साफ़ और पोषणकारी खाना न सिर्फ हलाल होता है, बल्कि पाक और उत्तम भी होता है। ऐसे खाने का स्वतंत्रता से उपभोग किया जा सकता है, जब तक वह अल्लाह की सीमा में हो।
इस आयत में तज़्किरा है कि पाक चीज़ें खाते वक़्त भी अल्लाह से डरते रहो। सिर्फ खाने-पीने में लगे रहना काफी नहीं, नेक आमाल और ईमान के साथ रहना ज़रूरी है। यह दुनिया बग़ैर दीन के कुछ भी नहीं, लेकिन जब इसमें ईमान शामिल हो जाता है, तो यह कीमती हो जाती है। मोमिन को चाहिए कि दुनियावी नेमतों के साथ रूहानी ज़िम्मेदारी भी निभाए।
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