Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanooo innamal khamru walmaisiru wal ansaabu wal azlaamu rijsum min 'amalish shaitaani fajtaniboohu la'al lakum tuflihoon)
यहाँ जो शराब का ज़िक्र है, वह अंगूर से बनी मदिरा है, जिसे इस्लाम में बिलकुल हराम और नापाक कहा गया है — चाहे नशा करे या न करे। यही हुक्म जुए के हर रूप पर लागू होता है — वह भी पूरी तरह हराम है। अन्य प्रकार की शराबें भी अगर नशा पैदा करती हैं, तो वे भी हराम हैं, थोड़ी मात्रा में भी।
इसी तरह, बुत-पूजा, बुत बनाना, उनकी ख़रीद-फ़रोख़्त, और किस्मत बताने, टोने-टोटकों, और झूठे माध्यमों से पैसा लेना या देना, सब कुछ सख़्ती से मना किया गया है।
इन सभी चीज़ों को शैतान के काम बताया गया है — यानी ये वो हथियार हैं जिनसे शैतान इंसान को गुमराह करता है। वह खुद तो ऐसा नहीं करता, लेकिन लोगों को उकसाता है ताकि वे अल्लाह की नाफ़रमानी करें।
यह आयत उन पहले की आयतों को रद्द करती है जिनमें शराब अभी पूर्णतः हराम नहीं हुई थी। अब यह अंतिम और निर्णायक हुक्म है।
इस आयत से दो अहम बातें सीखने को मिलती हैं:
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