कुरान - 5:83 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

83
وَإِذَا سَمِعُواْ مَآ أُنزِلَ إِلَى ٱلرَّسُولِ تَرَىٰٓ أَعۡيُنَهُمۡ تَفِيضُ مِنَ ٱلدَّمۡعِ مِمَّا عَرَفُواْ مِنَ ٱلۡحَقِّۖ يَقُولُونَ رَبَّنَآ ءَامَنَّا فَٱكۡتُبۡنَا مَعَ ٱلشَّـٰهِدِينَ

Transliteration: (Wa izaa sami'oo maaa unzila ilar Rasooli taraaa a'yunahum tafeedu minad dam'i mimmmaa 'arafoo minalhaqq; yaqooloona Rabbanaaa aamannaa faktubnaa ma'ash shaahideen)

और जब वे सुनते हैं वह जो नाज़िल किया गया है रसूल पर, तो तुम देखोगे कि उनकी आँखों से आँसू बहने लगते हैं, इस वजह से कि उन्होंने हक़ को पहचान लिया। वे कहते हैं: "ऐ हमारे रब! हम ईमान लाए, लिहाज़ा हमें (हक़ के) गवाहों में लिख ले।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 83 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 83 की तफ़्सीर

✅ [235] हक़ को पहचानकर रो पड़ना

जब नसारा ने क़ुरआन की आयतें सुनीं, और हक़ को पहचान लिया, तो उनकी आँखों से आँसू बहने लगे — यह उनके सच्चे ईमान और इंकिसारी की अलामत थी।

✅ [236] अल्लाह की मोहब्बत और ख़ौफ़ में रोना

इस आयत से साबित होता है कि अल्लाह की याद में रोना, चाहे मोहब्बत में हो या डर में, एक इबादत है और रूहानी क़ुर्ब का ज़रिया है।

✅ [237] गवाही देने वालों में शुमार होना

उनका कहना — "हमें गवाहों में लिख ले" — यह दुआ है कि हम भी उन लोगों में हो जाएँ जो हक़ की गवाही देने वाले हैं, और ईमान वालों की सफ़ में शुमार किए जाएँ।

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