कुरान - 5:82 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

82
۞لَتَجِدَنَّ أَشَدَّ ٱلنَّاسِ عَدَٰوَةٗ لِّلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱلۡيَهُودَ وَٱلَّذِينَ أَشۡرَكُواْۖ وَلَتَجِدَنَّ أَقۡرَبَهُم مَّوَدَّةٗ لِّلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱلَّذِينَ قَالُوٓاْ إِنَّا نَصَٰرَىٰۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّ مِنۡهُمۡ قِسِّيسِينَ وَرُهۡبَانٗا وَأَنَّهُمۡ لَا يَسۡتَكۡبِرُونَ

Transliteration: (Latajidanna ashad dan naasi 'adaawatal lillazeena aamanul Yahooda wallazeena ashrakoo wa latajidanna aqrabahum mawaddatal lil lazeena aamanul lazeena qaalooo innaa Nasaaraa; zaalika bi anna minhum qiseeseena wa ruhbaananw wa annahum laa yastakbiroon)

तुम ज़रूर पाओगे कि ईमान वालों से सबसे ज़्यादा दुश्मनी रखने वाले यहूद और मुश्रिक हैं [232], और तुम ज़रूर पाओगे कि ईमान वालों के सबसे ज़्यादा क़रीब मुहब्बत में वे हैं जो कहते हैं: हम नसारा (ईसाई) हैं [233]। यह इसलिए है कि उनमें कुछ पादरी और साधु होते हैं, और वे घमंड नहीं करते [234]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 82 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 82 की तफ़्सीर

✅ [232] यहूद और मुश्रिकों की सख़्त दुश्मनी

ईमान वालों से सबसे ज़्यादा सख़्त दुश्मनी रखने वाले यहूद और मुश्रिक हैं, क्योंकि उनका दिल्लगी और हसद खुलकर ज़ाहिर होता है।

✅ [233] नसाराओं की मुहब्बत

उनमें से जो कहते हैं हम नसारा हैं, वे मोमिनों से सबसे ज़्यादा मुहब्बत करने वाले हैं, क्योंकि उनका रवैया नरम और दिल सच्चाई की तरफ़ झुकने वाला होता है।

✅ [234] रूहानी पेशवाओं की मौजूदगी और इंकिसारी

यह इसलिए है कि उनमें पादरी (आलिम) और राहिब (परहेज़गार) लोग होते हैं और वे तकब्बुर नहीं करते, यानी वे इंकिसारी और सच्चाई को क़ुबूल करने वाले होते हैं।

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