Transliteration: (Summa khalaqnan nutfata 'alaqatan fakhalaqnal 'alaqata mudghatan fakhalaq nal mudghata 'izaaman fakasawnal 'izaama lahman summa anshaanaahu khalqan aakhar; fatabaarakal laahu ahsanul khaaliqeen)
"फिर हमने उस नुत्फ़े को जमे हुए ख़ून का लोथड़ा (अलक़ा) बनाया, फिर उस लोथड़े को गोश्त की बोटी (मुज़ग़ा) बनाया, फिर उस बोटी की हड्डियाँ बनाईं [14], फिर हड्डियों पर गोश्त चढ़ाया; फिर हमने उसे एक दूसरी ही सूरत (जिस्म व रूह) में बना खड़ा किया [15]; पस बड़ा ही बा-बरकत है अल्लाह जो सबसे बेहतरीन पैदा करने वाला है [16] !"
हदीस शरीफ़ में आता है कि नुत्फ़ा चालीस दिन तक मां के पेट में रहता है, फिर चालीस दिन जमे हुए ख़ून का लोथड़ा (अलक़ा) रहता है, फिर चालीस दिन गोश्त की बोटी (मुज़ग़ा) रहता है। फिर अल्लाह की क़ुदरत से उसमें हड्डियां बनती हैं और उन पर गोश्त का लिबास चढ़ाया जाता है।
चार माह पूरे होने के बाद फ़रिश्ता उसमें रूह फूंकता है और उसे सुनने, देखने और बोलने की सलाहियतें अता होती हैं। फिर वह एक मुकम्मल, ख़ूबसूरत और अज़ीम मख़लूक़ बनकर सामने आता है जिसे अशरफ़ुल मख़लूक़ात कहा गया।
अरबी ज़बान में 'ख़लक़' तख़लीक़ और सूरतगरी दोनों के लिए आता है। अल्लाह तआला की तख़लीक़ बे-मिसाल, ला-जवाब और मुकम्मल तरीन है। उसकी शान सबसे आला व बा-बरकत है।
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