Transliteration: (Summa innakum ba'da zaalika la maiyitoon)
"फिर बेशक तुम इसके बाद ज़रूर मरने वाले हो [17];"
इंसान दुनिया में चाहे कितनी ही ताक़त, जवानी और दौलत हासिल कर ले, मगर अपनी मुक़र्ररा मुद्दत पूरी करने के बाद उसे मौत का मज़ा चखना है। कोई शख़्स मौत के शिकंजे से बच नहीं सकता।
मुफ़स्सिरीन फ़रमाते हैं कि इस आयत से साबित होता है कि हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अभी तक दुनियावी हयात पूरी नहीं फ़रमाई है, इसलिए वे आसमान पर ज़िन्दा हैं और क़ियामत के क़रीब ज़मीन पर उतर कर अपनी हयात पूरी फ़रमाएंगे और फिर वफ़ात पाएंगे।
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