कुरान - 23:17 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
وَلَقَدۡ خَلَقۡنَا فَوۡقَكُمۡ سَبۡعَ طَرَآئِقَ وَمَا كُنَّا عَنِ ٱلۡخَلۡقِ غَٰفِلِينَ

Transliteration: (Wa laqad khalaqnaa fawqakum sab'a taraaa'iqa wa maa kunnaa 'anil khalqi ghaafileen)

17. और बेशक हमने तुम्हारे ऊपर सात रास्ते (आसमान) बनाए हैं [19]; और हम अपनी मख़्लूक़ (की हिफ़ाज़त व ज़रूरतों) से कभी बे-ख़बर नहीं हैं [20] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 17 की तफ़सीर

"और बेशक हमने तुम्हारे ऊपर सात रास्ते (आसमान) बनाए हैं [19]; और हम अपनी मख़्लूक़ (की हिफ़ाज़त व ज़रूरतों) से कभी बे-ख़बर नहीं हैं [20] ।"

[19] सात आसमान और फ़रिश्तों के रास्ते

'सबअ तराईक़' से मुराद सात आसमान हैं जो एक दूसरे के ऊपर ब-तरतीब बने हुए हैं, जिनमें फ़रिश्तों के आने-जाने और अहकाम नाज़िल होने के रास्ते हैं।

[20] मख़लूक़ से अल्लाह की बे-ख़बरी नहीं

अल्लाह तआला अपनी मख़लूक़ की ज़रूरतों, उनकी हिफ़ाज़त और उनके हालात से एक लम्हे के लिए भी ग़ाफ़िल नहीं है। बन्दे अगरचे अल्लाह को भूल जाएं, मगर अल्लाह अपने बन्दों को कभी नहीं भूलता और सबको रिज़्क़ अता फ़रमाता है।

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