कुरान - 23:19 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
فَأَنشَأۡنَا لَكُم بِهِۦ جَنَّـٰتٖ مِّن نَّخِيلٖ وَأَعۡنَٰبٖ لَّكُمۡ فِيهَا فَوَٰكِهُ كَثِيرَةٞ وَمِنۡهَا تَأۡكُلُونَ

Transliteration: (Fa anshaanaa lakum bihee Jannaatim min nakheelinw wa a'naab; lakum feehaa fawaakihu kaseeratunw wa minhaa taakuloon)

19. फिर हमने उसके ज़रिये तुम्हारे लिए खजूरों और अंगूरों के बाग़ात पैदा किए, तुम्हारे लिए उनमें बहुत से फल हैं [24] और उन्हीं में से तुम खाते हो [25]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 19 की तफ़सीर

"फिर हमने उसके ज़रिये तुम्हारे लिए खजूरों और अंगूरों के बाग़ात पैदा किए, तुम्हारे लिए उनमें बहुत से फल हैं [24] और उन्हीं में से तुम खाते हो [25];"

[24] खजूर और अंगूर की ख़ुसूसियत

बारिश के पानी से अल्लाह ने मुतअद्दिद फल उगाए, मगर खजूर और अंगूर का ख़ास ज़िक्र फ़रमाया क्योंकि ये दोनों फल ग़िज़ा भी हैं, दवा भी, और लज़ीज़ मेवे भी। इमाम आज़म अबू हनीफ़ा (रज़ियल्लाहु अन्हु) के नज़दीक इनकी अहमियत की वजह से बाज़ फ़िक़्ही मामलात में इन्हें आम फलों से मुम्ताज़ रखा गया है।

[25] रिज़्क़ का इस्तेमाल और हुक़ूक़ की अदायगी

'उन्हीं में से तुम खाते हो' फ़रमाकर इशारा किया गया कि अपने माल और ग़ल्ले का कुछ हिस्सा खुद इस्तेमाल करो और कुछ हिस्सा अल्लाह की राह में ग़रीबों को खिलाओ।

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