कुरान - 23:20 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
وَشَجَرَةٗ تَخۡرُجُ مِن طُورِ سَيۡنَآءَ تَنۢبُتُ بِٱلدُّهۡنِ وَصِبۡغٖ لِّلۡأٓكِلِينَ

Transliteration: (Wa shajaratan takhruju min Toori Sainaaa'a tambutu bidduhni wa sibghil lil aakileen)

20. और वह दरख़्त भी (पैदा किया) जो तूरे सीना से निकलता है [26], जो तेल और खाने वालों के लिए सालन (ज़ैतून) लेकर उगता है [27] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 20 की तफ़सीर

"और वह दरख़्त भी (पैदा किया) जो तूरे सीना से निकलता है [26], जो तेल और खाने वालों के लिए सालन (ज़ैतून) लेकर उगता है [27] ।"

[26] तूरे सीना का बा-बरकत ज़ैतून का दरख़्त

इससे मुराद ज़ैतून का मुक़द्दस दरख़्त है। अगरचे ज़ैतून कई मुल्कों (शाम, फ़िलिस्तीन) में पैदा होता है, मगर इसकी असल और बा-बरकत पैदाइश तूरे सीना (कोहे तूर) की सरज़मीन है जहाँ हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने कलामे इलाही की सआदत पाई थी।

[27] ज़ैतून के तेल के मुतअद्दिद फ़ायदे

ज़ैतून का तेल रोशनी के लिए चिराग़ों में इस्तेमाल होता है, जिस्म की मालिश और दवा के तौर पर शफ़ा देता है, और रोटी के साथ सालन के तौर पर खाया जाता है। क़ुरआन मजीद में इसे बा-बरकत दरख़्त (शजरतिन मुबारका) फ़रमाया गया है।

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