कुरान - 23:18 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
وَأَنزَلۡنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءَۢ بِقَدَرٖ فَأَسۡكَنَّـٰهُ فِي ٱلۡأَرۡضِۖ وَإِنَّا عَلَىٰ ذَهَابِۭ بِهِۦ لَقَٰدِرُونَ

Transliteration: (Wa anzalnaa minas samaaa'i maaa'am biqadarin fa-askannaahu fil ardi wa innaa 'alaa zahaabim bihee laqaa diroon)

18. और हमने आसमान से एक नाप-तौल (अंदाज़े) के साथ पानी उतारा [21], फिर हमने उसे ज़मीन में ठहरा दिया [22]; और बेशक हम उसे उड़ा ले जाने (सुखा देने) पर भी पूरी तरह क़ादिर हैं [23] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 18 की तफ़सीर

"और हमने आसमान से एक नाप-तौल (अंदाज़े) के साथ पानी उतारा [21], फिर हमने उसे ज़मीन में ठहरा दिया [22]; और बेशक हम उसे उड़ा ले जाने (सुखा देने) पर भी पूरी तरह क़ादिर हैं [23] ।"

[21] आसमान से अंदाज़े के मुताबिक़ बारिश

पानी का अस्ल मम्बा आसमान है। अल्लाह तआला हर ख़ित्ते की ज़रूरत और हिकमत के मुताबिक़ बारिश बरसाता है—जहाँ जितनी ज़रूरत होती है उतना ही पानी नाज़िल फ़रमाता है ताकि न क़हत पड़े और न सैलाब से बस्तियां बर्बाद हों।

[22] ज़मीन में पानी का ज़ख़ीरा

अल्लाह तआला ने बारिश के पानी को ज़मीन के अंदर चश्मों, कुओं और ज़ेरे ज़मीन तहों में महफ़ूज़ कर दिया ताकि वह सड़े नहीं और इंसान साल भर मीठा और पाकीज़ा पानी हासिल करते रहें।

[23] पानी को छीन लेने पर क़ुदरत

अल्लाह तआला इस बात पर पूरी तरह क़ादिर है कि ज़मीन के पानी को सूखा दे या इतना गहरा कर दे कि कोई उसे निकाल न सके। इसलिए पानी की नेमत पर हमेशा अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए।

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