Transliteration: (Wa anzalnaa minas samaaa'i maaa'am biqadarin fa-askannaahu fil ardi wa innaa 'alaa zahaabim bihee laqaa diroon)
"और हमने आसमान से एक नाप-तौल (अंदाज़े) के साथ पानी उतारा [21], फिर हमने उसे ज़मीन में ठहरा दिया [22]; और बेशक हम उसे उड़ा ले जाने (सुखा देने) पर भी पूरी तरह क़ादिर हैं [23] ।"
पानी का अस्ल मम्बा आसमान है। अल्लाह तआला हर ख़ित्ते की ज़रूरत और हिकमत के मुताबिक़ बारिश बरसाता है—जहाँ जितनी ज़रूरत होती है उतना ही पानी नाज़िल फ़रमाता है ताकि न क़हत पड़े और न सैलाब से बस्तियां बर्बाद हों।
अल्लाह तआला ने बारिश के पानी को ज़मीन के अंदर चश्मों, कुओं और ज़ेरे ज़मीन तहों में महफ़ूज़ कर दिया ताकि वह सड़े नहीं और इंसान साल भर मीठा और पाकीज़ा पानी हासिल करते रहें।
अल्लाह तआला इस बात पर पूरी तरह क़ादिर है कि ज़मीन के पानी को सूखा दे या इतना गहरा कर दे कि कोई उसे निकाल न सके। इसलिए पानी की नेमत पर हमेशा अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए।
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