Transliteration: (Qul mam bi yadihee malakootu kulli shai'inw wa Huwa yujeeru wa laa yujaaru 'alaihi in kuntum ta'lamoon)
"आप पूछिए, 'वह कौन है जिसके हाथ में हर चीज़ की मुकम्मल बादशाही है [122], और वह पनाह देता है और उसके मुक़ाबले में कोई पनाह नहीं दे सकता [123], अगर तुम जानते हो?'"
यह आयत कायनात के मुतलक़ इख़्तियार और हाकिमियत को बयान करती है। लफ़्ज़ मुलुक (मिल्कियत) और मलकूत (बातिनी व कामिल हाकिमियत) में फ़र्क़ है:
दुनियावी हुक्मरान ज़ाहिरी मुल्क पर हुकूमत करते हैं,
लेकिन मलकूत—यानी रूहों, ज़िन्दगी, मौत, सेहत, बीमारी और रिज़्क़ पर कामिल इख़्तियार—सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह तआला का है।
अल्लाह ही हक़ीक़ी पनाह देने वाला है—वह जिसे पनाह दे उसे कोई नुक़सान नहीं पहुंचा सकता, और जिसके ख़िलाफ़ वह फ़ैसला फ़रमाए उसे कोई बचा नहीं सकता। यह हक़ीक़त तमाम झूठे माबूदों और शरीकों की नफ़ी कर देती है।
मुशरिकों की गुमराही यह थी कि वे इन सिफ़ात को मानकर भी फ़रिश्तों, बुतों या हस्तियों को अल्लाह की तदबीर में शरीक समझते थे। सच्ची तौहीद यह है कि अल्लाह की सिफ़ात में किसी को साझीदार न माना जाए और हुज़ूर अकरम ﷺ को अल्लाह का सच्चा वासिता व रसूल माना जाए।
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