कुरान - 23:90 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

90
بَلۡ أَتَيۡنَٰهُم بِٱلۡحَقِّ وَإِنَّهُمۡ لَكَٰذِبُونَ

Transliteration: (Bal atainaahum bil haqqi wa innahum lakaaziboon)

बल्कि हमने उनके पास हक़ पहुंचाया है, और बेशक वे सरासर झूठे हैं [125]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 90 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 90

"बल्कि हमने उनके पास हक़ पहुंचाया है, और बेशक वे सरासर झूठे हैं [125]!"

[125] हक़ की आमद और बातिल का झूठ

यह आयत मुनकिरीन के ख़िलाफ़ क़तई फ़ैसला सुनाती है। अल्लाह की कुदरत के बाज़ पहलुओं को ज़बान से मानने के बावजूद उन्हें झूठा क़रार दिया गया, क्योंकि उनका बातिन और अमल उनके कौल के ख़िलाफ़ था:

  • वे क़ियामत का इन्कार करते थे,

  • शिर्क पर अड़े हुए थे,

  • हराम को हलाल ठहराते थे, और

  • ज़बान से जो कहते थे, दिल से उसकी तसदीक़ नहीं करते थे।

लिहाज़ा उनका ज़बानी दावा खोखला था और वे हक़ के मुक़ाबले में सरासर झूठे और सरकश थे।

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