कुरान - 83:32 सूरह अल-मुतफ़्फ़िफ़ीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
وَإِذَا رَأَوۡهُمۡ قَالُوٓاْ إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ لَضَآلُّونَ

Transliteration: (Wa izaa ra awhum qaalooo inna haaa'ulaaa'i ladaaal loon)

32. और जब वे उन्हें देखते, तो कहते, "निश्चित ही ये लोग गुमराह हैं।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुतफ़्फ़िफ़ीन आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

✨ सहाबा का एहतराम – एक अहम सबक़ (Respect for the Noble Companions – An Important Lesson)

इससे हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह के नेक बंदों, ख़ासकर नबी ﷺ के मुबारक सहाबा को गुमराह कहना काफ़िरों का तरीक़ा है, और उनका मज़ाक़ उड़ाना कुफ़्र का अमल है।

🔹 सहाबा-ए-किराम (रज़ि.अ) वह लोग हैं जिन पर अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की ख़ास रहमत थी।

🔹 उन्हें गुमराह कहना या उनकी शान में कोई गुस्ताख़ी करना ख़ुद अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के फ़ैसले की मुख़ालिफ़त करना है।

🔹 इस्लाम हमें सिखाता है कि जिन पर अल्लाह राज़ी हो चुका, उनके बारे में ऐतराज़ उठाना एक ख़तरनाक सोच है।

🔹 लिहाज़ा, मोमिन को सहाबा-ए-किराम की मोहब्बत और अज़मत अपने दिल में रखनी चाहिए और उनकी तौहीन से बचना चाहिए।

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