कुरान - 83:33 सूरह अल-मुतफ़्फ़िफ़ीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
وَمَآ أُرۡسِلُواْ عَلَيۡهِمۡ حَٰفِظِينَ

Transliteration: (Wa maaa ursiloo 'alaihim haafizeen )

33. हालाँकि वे उनपर निरीक्षक बनाकर नहीं भेजे गए थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुतफ़्फ़िफ़ीन आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

✨ अपनी आख़िरत की फ़िक्र करें (Be Concerned About Your Own Hereafter)

इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अपनी आख़िरत की फ़िक्र को अपनी ज़िम्मेदारी बनाए और दूसरों की फ़िक्र में इस क़दर न डूब जाए कि अपनी ही निजात (मुक्ति) से ग़ाफ़िल हो जाए।

🔹 हर शख़्स को अपने आमाल (कर्मों) का हिसाब देना है, इसलिए उसे चाहिए कि वह सबसे पहले अपने हालात पर ध्यान दे।

🔹 दूसरों की ग़लतियों पर ध्यान देने से पहले इंसान को अपनी ग़लतियों को सुधारने की कोशिश करनी चाहिए।

🔹 दूसरों की हिदायत की फ़िक्र करना अच्छा है, लेकिन अगर इंसान ख़ुद ही ग़फलत में पड़ जाए, तो यह उसकी अपनी आख़िरत के लिए ख़तरनाक हो सकता है।

🔹 इस्लाम तवाज़ुन (संतुलन) सिखाता है – न तो दूसरों की बेतहाशा चिंता में पड़कर अपनी आख़िरत भुलानी चाहिए, और न ही दूसरों की भलाई के बारे में बिल्कुल लापरवाह होना चाहिए।

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