कुरान - 101:1 सूरह अल-कारीआह अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
ٱلۡقَارِعَةُ

Transliteration: (Al qaari'ah)

1.वो ख़ौफ़नाक मुसीबत। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कारीआह आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर (Explanation):

"अल-क़ारिआह" का अर्थ है 'दस्तक देने वाली' या 'चौंका देने वाली घटना'। यह क़यामत (Day of Judgment) के दिन का वर्णन करती है, जो इंसानों के लिए अत्यंत खौफ़नाक और चौंका देने वाला होगा। इस दिन पहाड़ रेज़ा-रेज़ा (dust particles) हो जाएंगे और इंसानों को उनके अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब देना होगा। इस आयत में क़यामत की सच्चाई और उसकी गंभीरता को बयान किया गया है।

ख़ास बातें (Key Points):

1. अल-क़ारिआह (القَارِعَةُ):

  • यह क़यामत (Day of Judgment) का एक नाम है, जिसका मतलब है 'दस्तक देने वाली' या 'चौंका देने वाली घटना'।
  • यह वह दिन होगा जब हर चीज़ अस्त-व्यस्त हो जाएगी और इंसान को उसके कर्मों का हिसाब देना होगा।

2. खौफ़नाक मंजर (Terrifying Scene):

  • इस दिन पहाड़ रेज़ा-रेज़ा (crumbled into dust) हो जाएंगे, और पूरी कायनात (universe) तबाह हो जाएगी।
  • यह अल्लाह की क़ुदरत (power) और इंसान की असहायता (helplessness) को दर्शाता है।

3. इंसानों का हिसाब (Accountability of Humans):

  • हर व्यक्ति के छोटे से छोटे और बड़े से बड़े कर्म को तोला जाएगा।
  • अल्लाह के सामने कोई बात छुप नहीं सकेगी।

4. चेतावनी और सबक (Warning and Lesson):

  • यह आयत इंसानों को अल्लाह की नाफ़रमानी (disobedience) से बचने और नेक रास्ते पर चलने की चेतावनी देती है।
  • इसका मक़सद इंसानों को उनकी ज़िम्मेदारी और आखिरत (Hereafter) की सच्चाई का एहसास दिलाना है।

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