कुरान - 101:4 सूरह अल-कारीआह अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
يَوۡمَ يَكُونُ ٱلنَّاسُ كَٱلۡفَرَاشِ ٱلۡمَبۡثُوثِ

Transliteration: (Yauma ya koonun naasu kal farashil mabthooth)

4.वो दिन जब इंसान रि‍त‍ी हुई पतंगों की तरह बिखर जाएंगे [3]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कारीआह आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

वो दिन जब इंसान बिखरे हुए पतंगे होंगे (The Day When Mankind Will Be Like Scattered Moths)

क़यामत के दिन पहले सूर के वक्त, लोग हर तरफ डर से घबराकर इधर-उधर भाग रहे होंगे। उनका यह भागना उसी तरह होगा जैसे किसी दीपक की रोशनी बुझने पर पतंगे इधर-उधर बिखर जाते हैं। यह आयत उस अफरा-तफरी और घबराहट की तरफ इशारा करती है, जो लोग या तो पनाह ढूंढने के लिए करेंगे या दूसरे सूर के वक्त दोबारा ज़िंदा होकर हिसाब-किताब के मैदान की तरफ भागेंगे।

इस तुलना में दिखाया गया है कि लोग किस तरह भटकते और गहरे डर में डूबे होंगे, जैसे जलते हुए दीपक के पास पतंगे बिना दिशा के उड़ते हैं। हालाँकि जिन्नात और जानवर भी दोबारा उठाए जाएंगे, लेकिन यहाँ इंसानों पर ज़ोर दिया गया है, क्योंकि वही हिसाब-किताब के असली हक़दार हैं। "इंसान" का मतलब हर शख्स से है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, अमीर हो या ग़रीब, नेक हो या गुनहगार।

पुनरुत्थान (resurrection) और जमा होना बहुत जल्दी होगा। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, एक गहरा सन्नाटा छा जाएगा। उस वक्त कोई भी घमंड या बड़प्पन नहीं दिखा पाएगा। इसी वजह से इंसानों को इस हालत में पतंगों के साथ तुलना की गई है—उनकी विनम्रता और भय को दिखाने के लिए।

मुख्य बिंदु (Key Points):

  • पहला सूर और बिखरे पतंगे (First Trumpet and Scattered Moths): पहले सूर के वक्त लोग डर से इधर-उधर बिना दिशा के भागेंगे, जैसे पतंगे रोशनी बुझने पर बिखरते हैं।
  • पुनरुत्थान और हिसाब (Resurrection and Accountability): लोग हर दिशा में भागेंगे, या तो पहले सूर के वक्त या पुनरुत्थान के बाद, हिसाब-किताब के मैदान की तरफ।
  • इंसानों का पुनरुत्थान (Focus on Human Resurrection): हालाँकि जिन्नात और जानवर भी उठाए जाएंगे, लेकिन यहाँ इंसानों के पुनरुत्थान और उनके हिसाब पर ज़ोर दिया गया है।
  • तेज़ प्रक्रिया, बिना घमंड के (Short Time, No Pride): पुनरुत्थान तेज़ी से होगा, और उस वक्त कोई घमंड या श्रेष्ठता नहीं दिखा सकेगा। सभी डर और विनम्रता में होंगे।
  • पतंगों से तुलना (Comparison to Moths): पतंगों की तरह बिखरने की तुलना से उस समय के डर और अव्यवस्था को समझाया गया है।

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