कुरान - 101:3 सूरह अल-कारीआह अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
وَمَآ أَدۡرَىٰكَ مَا ٱلۡقَارِعَةُ

Transliteration: (Wa maa adraaka mal qaari'ah)

3.और तुम क्या जानो, यह ख़ौफ़नाक मुसीबत [2] क्या है? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कारीआह आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

निर्णय का दिन: भय और आतंक (Judgement Day: The Dread and Terror)

इस आयत में, यह बात उन ईमानवालों से की गई है जो क़ुरआन पढ़ते हैं। इसमें कहा गया है: "हे ईमानवालो! हालाँकि क़ुरआन और उसके मालिक ने निर्णय के दिन के भय के बारे में हर पहलू को समझाया है, फिर भी आप इसे सही तरीके से समझ नहीं पाएंगे। आप इसे केवल जब देखेंगे, तब जानेंगे।"

अगर यह बात हज़रत पैगंबर ﷺ के लिए है, तो इसका मतलब है: "हे मेरे प्यारे ﷺ, निर्णय के दिन का आतंक इतना बड़ा है कि आप इसे अपनी समझ और तर्क से नहीं समझ पाएंगे, हालाँकि आपकी समझ पूरी सृष्टि से बड़ी है। आप इसे अल्लाह के रहस्योद्घाटन और प्रकट रूप से जानते हैं।"

यह आयत पैगंबर ﷺ के ज्ञान को नकारती नहीं है, क्योंकि उन्होंने निर्णय के दिन के संकेतों को देखा था, जैसे निर्णय का दिन, जहन्नम, जन्नत और इन स्थानों से जुड़े सज़ा और इनाम, जो उन्हें रात की मीराज में और दूसरे रहस्योद्घाटनों के दौरान दिखाए गए थे।

मुख्य बिंदु (Key Points):

  • विश्वासियों की सीमित समझ (Believers' Limited Understanding): हालांकि क़ुरआन निर्णय के दिन के भय को अच्छे से समझाता है, लेकिन असली समझ इसे देखे बिना नहीं हो सकती।
  • पैगंबर ﷺ के लिए संबोधन (Address to the Prophet ﷺ): यह आयत पैगंबर ﷺ के लिए भी हो सकती है, जिसमें कहा गया है कि उनका बड़ा ज्ञान भी निर्णय के दिन के आतंक को पूरी तरह से नहीं समझ सकता, हालाँकि उनकी समझ सबसे ऊँची है।
  • दिव्य रहस्योद्घाटन (Divine Revelation): पैगंबर ﷺ का निर्णय के दिन, जहन्नम, जन्नत और उनके दंड और इनाम का ज्ञान अल्लाह के रहस्योद्घाटन से आता है, न कि व्यक्तिगत तर्क से।
  • पैगंबर ﷺ के ज्ञान का नकारा नहीं (No Negation of Prophet's Knowledge): आयत पैगंबर ﷺ के ज्ञान को कम नहीं करती, जिन्होंने मीराज की रात के दौरान इन सबको देखा था।

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