कुरान - 101:2 सूरह अल-कारीआह अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
مَا ٱلۡقَارِعَةُ

Transliteration: (Mal qaariah)

2.वो ख़ौफ़नाक मुसीबत क्या है [1] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कारीआह आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

निर्णय का दिन: भयावह आपदा (Judgement Day: The Frightening Calamity)

यह उस दिन को संदर्भित करता है जब सम्पूर्ण मानवता के दिलों को उसकी भय और आतंक से झटका लगेगा। निर्णय के दिन के लिए एक नाम "भयावह आपदा" है। यह ध्यान देना चाहिए कि पैगंबरों और संतों को निर्णय के दिन के दुःख से सुरक्षित रखा जाएगा। अल्लाह तआला कहते हैं: "वह बड़ा आतंक उन्हें दुःखित नहीं करेगा" (स21: आयत 103)। हालांकि, सामान्य लोग और कुछ विशेष व्यक्ति इस भय और आतंक का अनुभव करेंगे। इसी आतंक में लोग प्रिय शफीअत (सिफारिश करनेवाले) को भूल जाएंगे और अन्य महान पैगंबरों के पास जाएंगे। वास्तव में, पैगंबर स्वयं भी हज़रत मुहम्मद ﷺ का ठिकाना नहीं बता सकेंगे, फिर भी दुनिया में हर कोई जानता है कि अल्लाह के पाक पैगंबर ﷺ पापियों के लिए शफीअत (सिफारिश) करनेवाले हैं। यही भयावह आपदा का अर्थ है।

मुख्य बिंदु (Key Points):

  • भयावह आपदा (The Frightening Calamity): निर्णय के दिन का एक अन्य नाम, जब सभी लोग विशाल भय और आतंक का सामना करेंगे।
  • पैगंबरों और संतों की सुरक्षा (Protection for Prophets and Saints): उन्हें निर्णय के दिन के दुःख से सुरक्षित रखा जाएगा।
  • बड़ा आतंक (The Great Terror): अल्लाह कहते हैं कि यह आतंक पैगंबरों और संतों को प्रभावित नहीं करेगा (स21: आयत 103)।
  • लोगों का आतंक (People's Terror): सामान्य लोग और विशेष व्यक्ति दोनों निर्णय के दिन का भय अनुभव करेंगे।
  • पैगंबर ﷺ की शफीअत (Intercession of the Prophet ﷺ): इस आतंक के बीच, लोग शफीअत करनेवाले हज़रत मुहम्मद ﷺ को भूल जाएंगे, फिर भी हर कोई उन्हें पापियों के लिए शफीअत करनेवाला मानता है।

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