Transliteration: (Wa maa adraaka maa hiyah )
यह सवाल उस गढ़े (हाविया) की भयानक और अज़ीम हौलनाकी को ज़ाहिर करने के लिए किया गया है, जिसकी गहराई और शिद्दत का अंदाज़ा कोई इंसान नहीं लगा सकता। अगली आयत में फ़रमाया गया: 'नारुन हामिया' (वह दहकती हुई भड़कती आग है)।
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