कुरान - 101:8 सूरह अल-कारीआह अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
وَأَمَّا مَنۡ خَفَّتۡ مَوَٰزِينُهُۥ

Transliteration: (Wa amma man khaffat mawa zeenuh )

8.और जिनका पलड़ा हल्का होगा [6]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कारीआह आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

कर्मों का तौलना: न्याय का उपकरण, इनाम नहीं (Weighing of Deeds: A Tool for Justice, Not Bounty)

यह आयत बताती है कि क़यामत के दिन कर्मों का तौलना इनाम देने के लिए नहीं, बल्कि न्याय की स्थापना के लिए होगा। सच्चे ईमान वाले, जिन्होंने अल्लाह की रहमत प्राप्त की है, वे बिना तौले और हिसाब किए जन्नत में प्रवेश करेंगे। उनका जन्नत में प्रवेश अल्लाह की रहमत और बक्षिश का परिणाम है, न कि कर्मों के सटीक तौलने पर आधारित। जैसे खरीददारों का सामान खरीदने से पहले तौल लिया जाता है, भिखारियों को बिना मापे भीख दी जाती है, और दावत के मेहमानों को बिना किसी पैमाने के भोजन मिलता है, वैसे ही जिनपर अल्लाह की रहमत है, वे तौलने की प्रक्रिया से बचेंगे।

क़ुरआन में समान विषय (Similar Topics in the Quran):

  • सूरह अल-मुतफ़्फ़फीन (83:1-3): कर्मों के तौलने में न्याय की बात करती है और तौल में धोखाधड़ी करने की चेतावनी देती है, यह दिखाती है कि लेन-देन में निष्पक्षता कितनी महत्वपूर्ण है।
  • सूरह अल-आ'राफ़ (7:8-9): क़यामत के दिन तौलने के बारे में बताती है और यह दिखाती है कि यह न्याय करेगा, जिसमें नेक लोगों और बुरे लोगों में अंतर किया जाएगा।
  • सूरह अल-इन्सान (76:8-9): उन लोगों के इनाम के बारे में बात करती है जिन्होंने बिना किसी उम्मीद के दान दिया, यह दिखाते हुए कि अल्लाह का सच्चा इनाम कर्मों पर आधारित नहीं, बल्कि उसकी रहमत पर है।
  • सूरह अत-तौबा (9:72): अल्लाह सच्चे ईमान वालों को जन्नत और माफी का वादा करते हैं, जो कि उनके कर्मों के तौलने पर नहीं, बल्कि उनकी रहमत और कृपा पर आधारित है।

मुख्य बिंदु (Key Points):

  1. तौलने का उद्देश्य: क़यामत के दिन कर्मों का तौलना न्याय के लिए है, न कि इनाम देने या बक्षिश करने के लिए।
  2. ईमान वालों के लिए रहमत और बक्षिश: जो लोग अल्लाह की रहमत से जन्नत में प्रवेश करते हैं, उन्हें कर्मों का तौलने या जांचने की आवश्यकता नहीं है।
  3. नापे बिना देने के उदाहरण: जैसे भिखारियों को बिना मापे दान मिलता है और मेहमानों को दावत में बिना पैमाने के भोजन मिलता है, वैसे ही अल्लाह की रहमत से कुछ लोग बिना तौलने के जन्नत में जाएंगे।
  4. पापियों के लिए न्याय: जिनके कर्मों का तौलना होगा, उनके साथ निष्पक्षता और न्याय से बर्ताव किया जाएगा, और उनका स्थान निश्चित किया जाएगा।
  5. अल्लाह की रहमत पर जोर: यह आयत इस बात को उजागर करती है कि ईमान वालों का अंतिम इनाम अल्लाह की असीम रहमत पर आधारित है, न कि सिर्फ उनके कर्मों के हिसाब पर।

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