कुरान - 101:9 सूरह अल-कारीआह अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
فَأُمُّهُۥ هَاوِيَةٞ

Transliteration: (Fa-ummuhu haawiyah)

9.उसका घर होगा हाविया [7], जो गहरी खाई है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कारीआह आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

"His Mother Will Be Hawiyah" का अर्थ (The Meaning of "His Mother Will Be Hawiyah")
"उसकी माँ हौविया होगी" का मतलब है कि पापियों को नरक में डाला जाएगा, जो उनका आखिरी ठिकाना होगा। "हौविया" शब्द एक गहरे पतन को दर्शाता है, जो नरक की गहराई को symbol करता है। "माँ" के रूप में यह उपमा यह बताती है कि जैसे एक माँ का आंचल एक बच्चे के लिए शरण होता है, वैसे ही पापी लोगों के लिए नरक उनका आखिरी ठिकाना बनेगा, जिसमें से कोई बचाव नहीं होगा।

क़ुरआन में समान विषय (Similar Topics in the Quran)

  • सूरह अल-क़ारिआ (Surah Al-Qariah) (101:6-11): इस सूरह में क़यामत के दिन कर्मों के तौलने का ज़िक्र है, जहाँ नेक लोग जन्नत में जाएंगे और बुरे लोग नरक में जाएंगे।
  • सूरह अल-अंकीबुत (Surah Al-Ankabut) (29:69): जो लोग अल्लाह की राह में मेहनत करते हैं, उन्हें अच्छे इनाम मिलेंगे।
  • सूरह अल-मुतफ़्फ़फीन (Surah Al-Mutaffifin) (83:4-6): इस सूरह में कर्मों का सही तौलने का ज़िक्र है, जहाँ नेक लोगों को इनाम मिलता है और बुरे लोगों को सजा।
  • सूरह अल-आ'राफ़ (Surah Al-A'raf) (7:8-9): इस सूरह में कर्मों के तौलने का ज़िक्र है और यह दिखाया गया है कि किसे क्या सजा या इनाम मिलेगा।

मुख्य बिंदु (Key Points)

  1. अच्छे कर्मों का हल्कापन (Lightness of Good Deeds): अच्छे कर्मों का वजन ईमान वाले के लिए हल्का महसूस हो सकता है, जबकि तौलने पर वे भारी होते हैं।
  2. पाप का बोझ (Burden of Sin): अविश्वासियों के पाप उनके कर्मों पर भारी होंगे, और यह क़यामत के दिन उनके पछतावे को दिखाता है।
  3. भार की उपमा (Weight Analogy): जैसे पानी का वजन तालाब में बैठे हुए नहीं महसूस होता, वैसे ही पाप का बोझ क़यामत के दिन स्पष्ट होगा।
  4. "हौविया" का प्रतीक ("Hawiyah" का प्रतीक) (Symbolism of "Hawiyah"): "हौविया" का मतलब नरक की गहरी गहराई से है, जो पापियों का अंतिम ठिकाना होगा।
  5. नरक को अंतिम शरणस्थली (Hell as the Final Refuge): माँ की गोदी की उपमा यह बताती है कि नरक पापियों के लिए क़यामत के दिन आखिरी और अनिवार्य ठिकाना होगा।

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