Transliteration: (Wa in ta'uddoo ni'matal laahi laa tuhsoohaa; innal laaha la Ghafoorur Raheem)
"और अगर तुम अल्लाह की नेमतों को गिनो तो उन्हें शुमार न कर सकोगे [36]। बेशक अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है [37]।"
अल्लाह तआला ने इन्सान को जिस्मानी सेहत, अक़्ल, ईमान, हवा, पानी और रूहानी हिदायत जैसी अनगिनत नेमतें अता फ़रमाई हैं जिनका पूरा शुमार करना या पूरा शुक्र अदा करना इन्सान के बस में नहीं है।
बन्दों की कोताहियों, गुनाहों और नाफ़रमानियों के बावजूद अल्लाह तआला अपना रिज़्क़ और नेमतें बन्द नहीं फ़रमाता; और जो तौबा करे, उसके बड़े से बड़े गुनाह को भी माफ़ फ़रमा देता है।
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