Transliteration: (Afamany yakhluqu kamallaa yakhluq; afalaa tazak karoon)
"तो क्या जो पैदा करता है वह उस जैसा हो जाएगा जो कुछ नहीं बनाता [34]? तो क्या तुम नसीहत नहीं मानते [35]?"
अरब के मुशरिक़ीन बुतों को ख़ालिक़ नहीं मानते थे, फिर भी इबादत में उन्हें अल्लाह के बराबर ठहराते थे। आयत ने अक़्ली दलील दी कि जो ज़ात हर चीज़ की ख़ालिक़ है, उसके बराबर बेबस और बेजान बुत कैसे हो सकते हैं!
अल्लाह के मक़बूल बन्दों और शआइरिल्लाह (जैसे काबा, ज़मज़म) की ताज़ीम करना ईमान है, जबकि इबादत सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह तआला के लिए मख़्सूस है। बुत-परस्त बुतों को ख़ुदाई सिफ़ात देकर पूजते हैं जो खुला शिर्क है; जबकि मोमिन काबा का एहतिराम करते हुए सजदा सिर्फ़ अल्लाह को करता है।
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