कुरान - 16:15 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
وَأَلۡقَىٰ فِي ٱلۡأَرۡضِ رَوَٰسِيَ أَن تَمِيدَ بِكُمۡ وَأَنۡهَٰرٗا وَسُبُلٗا لَّعَلَّكُمۡ تَهۡتَدُونَ

Transliteration: (Wa alqaa fil ardi rawaasiya an tameeda bikum wa anhaaranw wa sublulal la 'allakum tahtadoon)

और उसने ज़मीन में लंगर (भारी पहाड़) डाल दिए कि तुम्हें लेकर हिचकोले न खाए [31], और नहरें और रास्ते बनाए ताकि तुम राह पाओ। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 15 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और उसने ज़मीन में लंगर डाल दिए कि तुम्हें लेकर हिचकोले न खाए [31], और नहरें और रास्ते बनाए ताकि तुम राह पाओ।"

[31] पहाड़ों का लंगर और ज़मीन का ठहराव

जैसे कश्ती को लंगर डालकर थाम दिया जाता है ताकि वह डोलने से महफ़ूज़ रहे, वैसे ही पहाड़ों के ज़रिए ज़मीन को ठहराव बख़्शा गया है ताकि इन्सान आराम से रह सके। तफ़सीरे रूहुल बयान के मुताबिक़ ज़मीन पर कुल पहाड़ों की तादाद 6,673 है (जिसमें छोटी पहाड़ियाँ शामिल नहीं हैं)।

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