कुरान - 16:13 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
وَمَا ذَرَأَ لَكُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُخۡتَلِفًا أَلۡوَٰنُهُۥٓۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّقَوۡمٖ يَذَّكَّرُونَ

Transliteration: (Wa maa zara a lakum fil ardi mukhtalifan alwaanuh; inna fee zaalika la Aayatal liqawminy yazakkaroon)

और जो कुछ उसने तुम्हारे लिए ज़मीन में रंग-बिरंग की चीज़ें फैला रखी हैं [24]। बेशक इसमें निशानी है नसीहत मानने वालों के लिए [25]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 13 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और जो कुछ उसने तुम्हारे लिए ज़मीन में रंग-बिरंग की चीज़ें फैला रखी हैं [24]। बेशक इसमें निशानी है नसीहत मानने वालों के लिए [25]।"

[24] दिल की ज़मीन और आमाल के रंग

सूफ़िया फ़रमाते हैं कि जैसे ज़मीन में रंग-बिरंगे फूल, दरख़्त और कांटे उगते हैं, वैसे ही इन्सानी दिल की ज़मीन में इश्क़-ए-इलाही, हुज़ूर ﷺ की मोहब्बत और इख़्लास के रंग-बिरंगे रूहानी फूल खिलते हैं; और दूसरी तरफ़ कुफ़्र व निफ़ाक़ के कांटे भी पैदा होते हैं।

[25] तफ़क्कुर वाला ज़िक्र

यहाँ लफ़्ज़ 'यज़्ज़क्करून' में ज़ाल पर तशदीद से मुराद वह ज़िक्र है जो गहरी सोच-विचार और तदब्बुर के साथ किया जाए। ऐसा ही ज़िक्र इन्सान को क़ुर्ब-ए-इलाही बख़्शता है।

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