Transliteration: (Wa maa zara a lakum fil ardi mukhtalifan alwaanuh; inna fee zaalika la Aayatal liqawminy yazakkaroon)
"और जो कुछ उसने तुम्हारे लिए ज़मीन में रंग-बिरंग की चीज़ें फैला रखी हैं [24]। बेशक इसमें निशानी है नसीहत मानने वालों के लिए [25]।"
सूफ़िया फ़रमाते हैं कि जैसे ज़मीन में रंग-बिरंगे फूल, दरख़्त और कांटे उगते हैं, वैसे ही इन्सानी दिल की ज़मीन में इश्क़-ए-इलाही, हुज़ूर ﷺ की मोहब्बत और इख़्लास के रंग-बिरंगे रूहानी फूल खिलते हैं; और दूसरी तरफ़ कुफ़्र व निफ़ाक़ के कांटे भी पैदा होते हैं।
यहाँ लफ़्ज़ 'यज़्ज़क्करून' में ज़ाल पर तशदीद से मुराद वह ज़िक्र है जो गहरी सोच-विचार और तदब्बुर के साथ किया जाए। ऐसा ही ज़िक्र इन्सान को क़ुर्ब-ए-इलाही बख़्शता है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat