Transliteration: (Wa sakkhkhara lakumul laila wannahaara wash shamsa walqamara wannujoomu musakhkharaatum bi amrih; inna fee zaalika la Aayaatil liqawminy ya'qiloon)
"और उसने तुम्हारे काम में लगाए रात [21] और दिन, और सूरज और चाँद; और सितारे उसके हुक्म के ताबे हैं [22]। बेशक इसमें निशानियाँ हैं अक़्लमन्दों के लिए [23]।"
चाँद, सूरज, रात, दिन और सितारे सब इन्सान की ख़िदमत और नफ़े के लिए बनाए गए हैं। अल्लाह को इनकी कोई ज़रूरत नहीं थी, यह सिर्फ़ इन्सान पर उसका एहसान है ताकि इन्सान शुक्रगुज़ारी इख़्तियार करे।
सूरज, चाँद और सितारों की मुसलसल गर्दिश से जहाँ दुनियावी निज़ाम चलता है, वहीं इस्लामी इबादतों (नमाज़ के औक़ात, रोज़े, ज़कात और हज) का तअय्युन भी इन्हीं के ज़रिए होता है।
क़ुरआन के नज़दीक हक़ीक़ी अक़्ल वही है जो इन्सान को अल्लाह की पहचान और उसकी बारगाह के क़रीब लाए। तिब्ब (चिकित्सा), रियाज़ी और साइंस के तमाम उलूम बहुत मुअज़्ज़म हैं अगर वे अल्लाह की क़ुदरत पर ग़ौर करने और उसकी निशानियों को पहचानने का ज़रिया बनें।
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