कुरान - 16:12 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
وَسَخَّرَ لَكُمُ ٱلَّيۡلَ وَٱلنَّهَارَ وَٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَۖ وَٱلنُّجُومُ مُسَخَّرَٰتُۢ بِأَمۡرِهِۦٓۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Wa sakkhkhara lakumul laila wannahaara wash shamsa walqamara wannujoomu musakhkharaatum bi amrih; inna fee zaalika la Aayaatil liqawminy ya'qiloon)

और उसने तुम्हारे काम में लगाए रात [21] और दिन, और सूरज और चाँद; और सितारे उसके हुक्म के ताबे हैं [22]। बेशक इसमें निशानियाँ हैं अक़्लमन्दों के लिए [23]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 12 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और उसने तुम्हारे काम में लगाए रात [21] और दिन, और सूरज और चाँद; और सितारे उसके हुक्म के ताबे हैं [22]। बेशक इसमें निशानियाँ हैं अक़्लमन्दों के लिए [23]।"

[21] कायनात की तख़्लीक़ इन्सान की ख़िदमत के लिए

चाँद, सूरज, रात, दिन और सितारे सब इन्सान की ख़िदमत और नफ़े के लिए बनाए गए हैं। अल्लाह को इनकी कोई ज़रूरत नहीं थी, यह सिर्फ़ इन्सान पर उसका एहसान है ताकि इन्सान शुक्रगुज़ारी इख़्तियार करे।

[22] आकाशीय निज़ाम और इबादतों का तअय्युन

सूरज, चाँद और सितारों की मुसलसल गर्दिश से जहाँ दुनियावी निज़ाम चलता है, वहीं इस्लामी इबादतों (नमाज़ के औक़ात, रोज़े, ज़कात और हज) का तअय्युन भी इन्हीं के ज़रिए होता है।

[23] हक़ीक़ी अक़्ल और साइंस की अफ़ज़लियत

क़ुरआन के नज़दीक हक़ीक़ी अक़्ल वही है जो इन्सान को अल्लाह की पहचान और उसकी बारगाह के क़रीब लाए। तिब्ब (चिकित्सा), रियाज़ी और साइंस के तमाम उलूम बहुत मुअज़्ज़म हैं अगर वे अल्लाह की क़ुदरत पर ग़ौर करने और उसकी निशानियों को पहचानने का ज़रिया बनें।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now