कुरान - 16:11 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
يُنۢبِتُ لَكُم بِهِ ٱلزَّرۡعَ وَٱلزَّيۡتُونَ وَٱلنَّخِيلَ وَٱلۡأَعۡنَٰبَ وَمِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّقَوۡمٖ يَتَفَكَّرُونَ

Transliteration: (Yumbitu lakum bihiz zar'a wazzaitoona wanna kheela wal-a'naaba wa min kullis samaraat, inna fee zaalika la Aayatal liqawminy yatafakkaroon)

वह उस पानी से तुम्हारे लिए खेती उगाता है, और ज़ैतून और खजूर और अँगूर और हर क़िस्म के फल [19]। बेशक इसमें निशानियाँ हैं ध्यान (फ़िक्र) करने वालों के लिए [20]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 11 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"वह उस पानी से तुम्हारे लिए खेती उगाता है, और ज़ैतून और खजूर और अँगूर और हर क़िस्म के फल [19]। बेशक इसमें निशानियाँ हैं ध्यान करने वालों के लिए [20]।"

[19] ज़ाहिरी व बातिनी नेमतें

सूफ़िया-ए-किराम फ़रमाते हैं कि शरीअत ईमान का खेत है और नेक आमाल उसके बीज व अनाज हैं; तरीक़त ईमान का बाग़ है और ज़िक्र व मारिफ़त उसके लज़ीज़ मेवे हैं। यह तमाम रूहानी निज़ाम क़ुरआन व हदीस से सैराब होता है।

[20] तरतीब और तफ़क्कुर की फ़ज़ीलत

खेती (ज़राअत) को बाग़ों पर मुक़द्दम रखा गया क्योंकि अनाज ज़िंदगी की बुनियादी ज़रूरत है, जबकि फल ज़ीनत व लज़्ज़त के लिए हैं। ज़ैतून, खजूर और अँगूर की ख़ास अफ़ज़लियत बयान हुई। इसके अलावा यह साबित हुआ कि ग़ौर व फ़िक्र (तदब्बुर) सिर्फ़ ज़बानी ज़िक्र से अफ़ज़ल है, और यही तफ़क्कुर इन्सान को विलायत के दर्जे तक पहुँचाता है।

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