Transliteration: (Wa 'alal laahi qasdus sabeeli wa minhaa jaaa'ir; wa law shaaa'a lahadaakum ajma'een)
"और सीधी राह का दिखाना अल्लाह के ज़िम्मे है [13], और कोई राह टेढ़ी है [14]। और अगर वह चाहता तो तुम सब को राह पर ले आता [15]।"
सीधी और मोअतदिल राह से मुराद दीन-ए-इस्लाम और ख़ास तौर पर मसलक-ए-अहले सुन्नत वल-जमाअत है। इस्लाम मोअतदिल रास्ता है — न इसमें यहूदियत जैसी सख़्ती है और न ईसाइयत जैसी बेजा छूट। इसी तरह अहले सुन्नत का अक़ीदा ख़वारिज और रवाफ़िज़ की ज़्यादतियों और बदअक़ीदगियों से पाक है; यही सच्चा रास्ता अल्लाह तक पहुँचाता है।
टेढ़े रास्तों से मुराद कुफ़्र, शिर्क और बातिल फ़िरक़े हैं — जैसे यहूदियत, ईसाइयत, और बातिल फ़िरक़े जैसे क़ादियानियत, ख़ारिजियत वग़ैरा। ये वे रास्ते हैं जो अल्लाह से दूर करते हैं।
हिदायत के दो दर्जे हैं: पहला रास्ता दिखाना जो अल्लाह ने सबको दिखाया; दूसरा रास्ते पर चला देना जो वह अपनी हिकमत से जिसे चाहे अता फ़रमाता है। इन्सान बिल्कुल मजबूर-ए-महज़ (पत्थर की तरह) नहीं है, बल्कि उसे इरादे और इख़्तियार की सलाहियत दी गई है जिसके सबब वह जज़ा या सज़ा का मुस्तहिक़ बनता है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat