कुरान - 16:9 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
وَعَلَى ٱللَّهِ قَصۡدُ ٱلسَّبِيلِ وَمِنۡهَا جَآئِرٞۚ وَلَوۡ شَآءَ لَهَدَىٰكُمۡ أَجۡمَعِينَ

Transliteration: (Wa 'alal laahi qasdus sabeeli wa minhaa jaaa'ir; wa law shaaa'a lahadaakum ajma'een)

और सीधी राह का दिखाना अल्लाह के ज़िम्मे है [13], और कोई राह टेढ़ी है [14]। और अगर वह चाहता तो तुम सब को राह पर ले आता [15]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 9 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और सीधी राह का दिखाना अल्लाह के ज़िम्मे है [13], और कोई राह टेढ़ी है [14]। और अगर वह चाहता तो तुम सब को राह पर ले आता [15]।"

[13] सिरात-ए-मुस्तक़ीम और मसलक-ए-अहले सुन्नत

सीधी और मोअतदिल राह से मुराद दीन-ए-इस्लाम और ख़ास तौर पर मसलक-ए-अहले सुन्नत वल-जमाअत है। इस्लाम मोअतदिल रास्ता है — न इसमें यहूदियत जैसी सख़्ती है और न ईसाइयत जैसी बेजा छूट। इसी तरह अहले सुन्नत का अक़ीदा ख़वारिज और रवाफ़िज़ की ज़्यादतियों और बदअक़ीदगियों से पाक है; यही सच्चा रास्ता अल्लाह तक पहुँचाता है।

[14] टेढ़े रास्ते और गुमराही

टेढ़े रास्तों से मुराद कुफ़्र, शिर्क और बातिल फ़िरक़े हैं — जैसे यहूदियत, ईसाइयत, और बातिल फ़िरक़े जैसे क़ादियानियत, ख़ारिजियत वग़ैरा। ये वे रास्ते हैं जो अल्लाह से दूर करते हैं।

[15] मशिय्यत-ए-इलाही और इन्सानी इख़्तियार

हिदायत के दो दर्जे हैं: पहला रास्ता दिखाना जो अल्लाह ने सबको दिखाया; दूसरा रास्ते पर चला देना जो वह अपनी हिकमत से जिसे चाहे अता फ़रमाता है। इन्सान बिल्कुल मजबूर-ए-महज़ (पत्थर की तरह) नहीं है, बल्कि उसे इरादे और इख़्तियार की सलाहियत दी गई है जिसके सबब वह जज़ा या सज़ा का मुस्तहिक़ बनता है।

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