कुरान - 16:7 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
وَتَحۡمِلُ أَثۡقَالَكُمۡ إِلَىٰ بَلَدٖ لَّمۡ تَكُونُواْ بَٰلِغِيهِ إِلَّا بِشِقِّ ٱلۡأَنفُسِۚ إِنَّ رَبَّكُمۡ لَرَءُوفٞ رَّحِيمٞ

Transliteration: (Wa tahmilu asqaalakum ilaa baladil lam takoonoo baaligheehi illaa bishiqqil anfus; inna Rabbakum la Ra'oofur Raheem)

और वे तुम्हारे बोझ उन शहरों तक उठा ले जाते हैं जहाँ तुम बिना आधी जान किए नहीं पहुँच सकते थे [9]। बेशक तुम्हारा रब निहायत शफ़ीक़ मेहरबान है [10]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 7 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और वे तुम्हारे बोझ उन शहरों तक उठा ले जाते हैं जहाँ तुम बिना आधी जान किए नहीं पहुँच सकते थे [9]। बेशक तुम्हारा रब निहायत शफ़ीक़ मेहरबान है [10]।"

[9] बारबरदारी की सहूलत अल्लाह की नेमत

अगर अल्लाह तआला ऊँट, खच्चर और ऐसे बारबरदार जानवर पैदा न फ़रमाता, तो दूर-दराज़ के शहरों और मुल्कों तक भारी तिजारती सामान ले जाना इन्सान के लिए नामुमकिन या अज़ाब बन जाता। अल्लाह ने इन जानवरों के ज़रिए इस सफ़र को आसान बना दिया।

[10] जानवरों की फ़रमाँबरदारी अल्लाह की रहमत

ये ऊँट, घोड़े और खच्चर अल्लाह का दिया हुआ चारा खाते हैं और इन्सानों की ख़िदमत करते हैं। यह केवल अल्लाह की शफ़क़त व रहमत है जिसने इतने ताक़तवर जानवरों के दिलों में कमज़ोर इन्सान की इताअत डाल दी; वर्ना अगर वे वहशी रहते तो उन पर क़ाबू पाना नामुमकिन होता।

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