कुरान - 16:10 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
هُوَ ٱلَّذِيٓ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗۖ لَّكُم مِّنۡهُ شَرَابٞ وَمِنۡهُ شَجَرٞ فِيهِ تُسِيمُونَ

Transliteration: (Huwal lazeee anzala minas samaaa'i maaa'al lakum minhu sharaabunw wa minhu shajarun feehi tuseemoon)

वही है जिसने आसमान से तुम्हारे लिए पानी उतारा [16], उसमें से कुछ पीने का है [17] और उसमें से दरख़्त (घास-पात) हैं जिनसे तुम मवेशी चराते हो [18]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 10 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"वही है जिसने आसमान से तुम्हारे लिए पानी उतारा [16], उसमें से कुछ पीने का है [17] और उसमें से दरख़्त हैं जिनसे तुम मवेशी चराते हो [18]।"

[16] ज़ाहिरी बारिश और रूहानी आब-ए-हयात

ज़ाहिरी तौर पर यह बादलों से बरसने वाली बारिश है। सूफ़िया-ए-किराम फ़रमाते हैं कि आसमानी बारिश की तरह आसमान-ए-नुबुव्वत से हुज़ूर अकरम ﷺ की ज़ात के ज़रिए क़ुरआन व हदीस का रूहानी पानी बरसा, जिसने मोमिनों के दिलों को ईमान से सैराब किया और उनके नेक आमाल सरसब्ज़ दरख़्तों की तरह लहलहा उठे।

[17] पीने का पानी और कुओं का निज़ाम

बारिश ही के ज़रिए ज़मीन के कुओं, चश्मों और नदियों में मीठा पानी जमा होता है जिसे इन्सान और जानवर पीते हैं। अगर बारिश न हो तो ज़मीन के तमाम ज़ख़ीरे सूख जाएँ।

[18] चरागाहें और मवेशियों की ख़ुराक

बारिश ही के ज़रिए वे दरख़्त, पौधे और घास उगती है जिससे इन्सान भी फ़ायदे उठाते हैं और अपने जानवरों को चराकर दूध और गोश्त हासिल करते हैं।

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