कुरान - 53:17 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
مَا زَاغَ ٱلۡبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ

Transliteration: (Maa zaaghal basaru wa maa taghaa)

न (नबी की) आँख किसी तरफ़ बहकी [20] और न हद से आगे बढ़ी! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 17

"न (नबी की) आँख किसी तरफ़ बहकी [20] और न हद से आगे बढ़ी!"


[20] 'मा ज़ाग़ल बसरु वमा तग़ा' - चश्म-ए-मुस्तफ़ा ﷺ का अदब व इस्मत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यह आयत हुज़ूर ﷺ के अदब और कमाल-ए-नज़र की सबसे बड़ी सनद है:

  • कमाल-ए-इस्तिक़ामत: मूसा (अलैहिस्सलाम) तजल्ली-ए-इलाही की ताब न लाकर बेसुध हो गए, मगर हुज़ूर ﷺ के दीदा-ए-मुबारक में न कोई झपकी आई और न नज़र इधर-उधर भटकी।
  • अदब की इंतिहा: आपने ठीक वहीं देखा जहाँ रब ने देखने का हुक्म फ़रमाया, न दायें-बायें देखा और न हद से तजावुज़ किया। यह कमाल-ए-हुस्न-ए-अदब सिर्फ़ मुहम्मदुर रसूलुल्लाह ﷺ ही का हिस्सा है।

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