कुरान - 53:21 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
أَلَكُمُ ٱلذَّكَرُ وَلَهُ ٱلۡأُنثَىٰ

Transliteration: (A-lakumuz zakaru wa lahul unsaa)

क्या तुम्हारे लिए तो बेटे हैं और अल्लाह के लिए बेटियाँ [23]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 21

"क्या तुम्हारे लिए तो बेटे हैं और अल्लाह के लिए बेटियाँ [23]?"


[23] मुशरिकीन की मुनाफ़िक़त और बातिल तक्सीम

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि मुशरिकीन-ए-अरब का यह निहायत शर्मनाक अक़ीदा था:

  • बेटियों से नफ़रत और रब की तरफ़ निस्बत: मुशरिक लोग ख़ुद तो बेटियों की पैदाइश को ज़िल्लत और रुसवाई समझते थे और अपनी बच्चियों को ज़िंदा दफ़न कर देते थे, मगर फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ ठहराते थे।
  • तज़ाद और बे-अक़्ली: अल्लाह तआला ने उनकी इस बे-अक़्ली और मुनाफ़िक़त की पोल खोली कि जिसे तुम अपने लिए ऐब समझते हो, उसे अल्लाह की तरफ़ मंसूब करते हो? क्या तुम्हारे पास ज़रा भी अक़्ल नहीं है? अल्लाह तआला औलाद और जिंसियत के हर तसव्वुर से पाक है।

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