कुरान - 53:23 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
إِنۡ هِيَ إِلَّآ أَسۡمَآءٞ سَمَّيۡتُمُوهَآ أَنتُمۡ وَءَابَآؤُكُم مَّآ أَنزَلَ ٱللَّهُ بِهَا مِن سُلۡطَٰنٍۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ وَمَا تَهۡوَى ٱلۡأَنفُسُۖ وَلَقَدۡ جَآءَهُم مِّن رَّبِّهِمُ ٱلۡهُدَىٰٓ

Transliteration: (In hiya illaaa asmaaa'un sammaitumoohaaa antum wa aabaaa'ukum maaa anzalal laahu bihaa min sultaan; inyyattabi'oona illaz zanna wa maa tahwal anfusu wa laqad jaaa'ahum mir Rabbihimul hudaa)

वे तो सिर्फ़ चंद नाम हैं जो तुमने और तुम्हारे बाप-दादाओं ने रख लिए हैं [24], जिसके लिए अल्लाह ने कोई सनद (दलील) नहीं उतारी [25]। वे महज़ गुमान और अपने नफ़्सों की ख़्वाहिशात के पीछे चल रहे हैं [26], हालाँकि उनके पास उनके रब की तरफ़ से हिदायत आ चुकी है [27]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 23

"वे तो सिर्फ़ चंद नाम हैं जो तुमने और तुम्हारे बाप-दादाओं ने रख लिए हैं [24], जिसके लिए अल्लाह ने कोई सनद (दलील) नहीं उतारी [25]। वे महज़ गुमान और अपने नफ़्सों की ख़्वाहिशात के पीछे चल रहे हैं [26], हालाँकि उनके पास उनके रब की तरफ़ से हिदायत आ चुकी है [27]।"


[24] ख़्याली और मन-गढ़ंत बुत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि लात, मनात और उज़्ज़ा जैसे बुत सिर्फ़ इंसानी वहम और ख़्याल की पैदावार हैं, उनकी कोई हक़ीक़त नहीं।

[25] बुतपरस्ती की कोई सनद नहीं

अल्लाह तआला ने कभी किसी नबी या आसमानी किताब में बुतों की पूजा की कोई सनद या इजाज़त नहीं दी; यह सब रस्म-ओ-रिवाज और जिहालत का नतीजा है।

[26] नफ़्सानी ख़्वाहिशात की पैरवी

मुशरिक लोग अपनी नफ़्सानी ख़्वाहिशात, रस्म-ओ-रिवाज और अंधे गुमान के ताबे होकर इन बुतों के आगे माथा टेकते हैं।

[27] क़ुरआन और नबी ﷺ की सच्ची हिदायत

हालाँकि अल्लाह तआला ने अपने रसूल मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ और क़ुरआन-ए-मजीद के ज़रिए वाज़ेह हिदायत भेज दी है, जिससे हक़ और बातिल पूरी तरह अलग हो चुके हैं।

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