Transliteration: (In hiya illaaa asmaaa'un sammaitumoohaaa antum wa aabaaa'ukum maaa anzalal laahu bihaa min sultaan; inyyattabi'oona illaz zanna wa maa tahwal anfusu wa laqad jaaa'ahum mir Rabbihimul hudaa)
"वे तो सिर्फ़ चंद नाम हैं जो तुमने और तुम्हारे बाप-दादाओं ने रख लिए हैं [24], जिसके लिए अल्लाह ने कोई सनद (दलील) नहीं उतारी [25]। वे महज़ गुमान और अपने नफ़्सों की ख़्वाहिशात के पीछे चल रहे हैं [26], हालाँकि उनके पास उनके रब की तरफ़ से हिदायत आ चुकी है [27]।"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि लात, मनात और उज़्ज़ा जैसे बुत सिर्फ़ इंसानी वहम और ख़्याल की पैदावार हैं, उनकी कोई हक़ीक़त नहीं।
अल्लाह तआला ने कभी किसी नबी या आसमानी किताब में बुतों की पूजा की कोई सनद या इजाज़त नहीं दी; यह सब रस्म-ओ-रिवाज और जिहालत का नतीजा है।
मुशरिक लोग अपनी नफ़्सानी ख़्वाहिशात, रस्म-ओ-रिवाज और अंधे गुमान के ताबे होकर इन बुतों के आगे माथा टेकते हैं।
हालाँकि अल्लाह तआला ने अपने रसूल मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ और क़ुरआन-ए-मजीद के ज़रिए वाज़ेह हिदायत भेज दी है, जिससे हक़ और बातिल पूरी तरह अलग हो चुके हैं।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat