Transliteration: (Am lil insaani maa taman naa)
"क्या इंसान को हर वह चीज़ मिल जाएगी जिसकी वह तमन्ना करता है [28]?"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'इंसान' से मुराद मुशरिक है और 'तमन्ना' से मुराद बुतों की शफ़ाअत की उम्मीद है:
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