कुरान - 53:26 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
۞وَكَم مِّن مَّلَكٖ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ لَا تُغۡنِي شَفَٰعَتُهُمۡ شَيۡـًٔا إِلَّا مِنۢ بَعۡدِ أَن يَأۡذَنَ ٱللَّهُ لِمَن يَشَآءُ وَيَرۡضَىٰٓ

Transliteration: (Wa kam mim malakin fissamaawaati laa tughnee shafaa'atuhum shai'an illaa mim ba'di anyyaazanal laahu limany yashaaa'u wa yardaa)

और आसमानों में कितने ही फ़रिश्ते हैं जिनकी शफ़ाअत कुछ भी काम नहीं आ सकती मगर जब अल्लाह इजाज़त दे जिसके लिए चाहे और जिसे पसंद फ़रमाए [30]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 26

"और आसमानों में कितने ही फ़रिश्ते हैं जिनकी शफ़ाअत कुछ भी काम नहीं आ सकती मगर जब अल्लाह इजाज़त दे जिसके लिए चाहे और जिसे पसंद फ़रमाए [30]!"


[30] इज़्न-ए-इलाही से शफ़ाअत का बरहक़ होना

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यह आयत शफ़ाअत-ए-इलाही के उसूल को वाज़ेह करती है:

  • इज़्ज़-ओ-जलाल के आगे बेबसी: जब मुक़र्रब फ़रिश्ते भी बिना इजाज़त-ए-इलाही के शफ़ाअत नहीं कर सकते, तो पत्थरों के तराशे हुए बुत भला कैसे किसी की सिफ़ारिश कर सकते हैं!
  • इज़ाज़त के बाद शफ़ाअत बरहक़: यह आयत साफ़ साबित करती है कि जब अल्लाह तआला अपने प्यारे बंदों और महबूब रसूल ﷺ को इजाज़त देगा, तो वे ज़रूर मोमिनीन की शफ़ाअत फ़रमाएँगे और उनकी शफ़ाअत क़बूल होगी।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now