कुरान - 53:27 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ لَيُسَمُّونَ ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةَ تَسۡمِيَةَ ٱلۡأُنثَىٰ

Transliteration: (innal lazeena laa yu'minoona bil aakhirati la yusammoonal malaaa'ikata tasmiyatal unsaa)

बेशक जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, वे फ़रिश्तों के नाम औरतों जैसे [31] रखते हैं! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 27

"बेशक जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, वे फ़रिश्तों के नाम औरतों जैसे [31] रखते हैं!"


[31] फ़रिश्तों को औरतें और देवियाँ ठहराने का रद्द

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि मुशरिकीन फ़रिश्तों को 'अल्लाह की बेटियाँ' और देवियाँ मानकर उनके ज़नाना नाम रखते थे:

  • मुशरिकाना रस्म: यह मुशरिकों की क़दीम आदत है कि वे माबूदों और फ़रिश्तों के जनाना नाम रखकर उनकी पूजा करते हैं, जैसा कि आज भी बातिल मज़ाहिब में देवियों की पूजा का चलन है।

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