Transliteration: (Fa a'rid 'am man tawallaa 'an zikrinaa wa lam yurid illal hayaatad dunyaa)
"तो आप उस शख़्स से मुँह फेर लीजिए जो हमारी याद (नसीहत) से मुँह मोड़ता है [33] और सिर्फ़ दुनिया की ज़िंदगी का तालिब है [34]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जो लोग हक़ की बात सुनना ही नहीं चाहते और सरकशी पर अड़े हुए हैं, नबी ﷺ को हुक्म दिया गया कि उनसे अपनी तवज्जोह हटा लें। हुज़ूर ﷺ ने कभी किसी मोमिन से मुँह नहीं मोड़ा, चाहे वह कितना ही कमज़ोर हो; यह हुक्म मुतअन्निद काफ़िरों के लिए है।
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि काफ़िरों की पूरी सोच सिर्फ़ दुनिया, माल और जिस्मानी लज़्ज़तों तक महदूद थी; आख़िरत और रूहानियत का उन्हें कोई ख़्याल न था।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat