कुरान - 53:29 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
فَأَعۡرِضۡ عَن مَّن تَوَلَّىٰ عَن ذِكۡرِنَا وَلَمۡ يُرِدۡ إِلَّا ٱلۡحَيَوٰةَ ٱلدُّنۡيَا

Transliteration: (Fa a'rid 'am man tawallaa 'an zikrinaa wa lam yurid illal hayaatad dunyaa)

तो आप उस शख़्स से मुँह फेर लीजिए जो हमारी याद (नसीहत) से मुँह मोड़ता है [33] और सिर्फ़ दुनिया की ज़िंदगी का तालिब है [34]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 29

"तो आप उस शख़्स से मुँह फेर लीजिए जो हमारी याद (नसीहत) से मुँह मोड़ता है [33] और सिर्फ़ दुनिया की ज़िंदगी का तालिब है [34]!"


[33] मुनकिरीन से एअराज़ का हुक्म

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जो लोग हक़ की बात सुनना ही नहीं चाहते और सरकशी पर अड़े हुए हैं, नबी ﷺ को हुक्म दिया गया कि उनसे अपनी तवज्जोह हटा लें। हुज़ूर ﷺ ने कभी किसी मोमिन से मुँह नहीं मोड़ा, चाहे वह कितना ही कमज़ोर हो; यह हुक्म मुतअन्निद काफ़िरों के लिए है।

[34] सिर्फ़ दुनियावी फ़ायदे में डूबे लोगों की ख़राबी

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि काफ़िरों की पूरी सोच सिर्फ़ दुनिया, माल और जिस्मानी लज़्ज़तों तक महदूद थी; आख़िरत और रूहानियत का उन्हें कोई ख़्याल न था।

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