कुरान - 53:30 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
ذَٰلِكَ مَبۡلَغُهُم مِّنَ ٱلۡعِلۡمِۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعۡلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِۦ وَهُوَ أَعۡلَمُ بِمَنِ ٱهۡتَدَىٰ

Transliteration: (Zalika mablaghuhum minal 'ilm; inna rabbaka huwa a'lamu biman dalla 'an sabee lihee wa huwa a'lamu bimanih tadaa)

यह उनके इल्म की इंतिहाई हद है; बेशक आपका रब ख़ूब जानता है उसे जो उसके रास्ते से बहक गया, और वह उसे भी ख़ूब जानता है जिसने हिदायत पाई [35]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 30

"यह उनके इल्म की इंतिहाई हद है; बेशक आपका रब ख़ूब जानता है उसे जो उसके रास्ते से बहक गया, और वह उसे भी ख़ूब जानता है जिसने हिदायत पाई [35]!"


[35] इंसानी इल्म की महदूदियत और रब का कामिल इल्म

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि काफ़िरों की अक़्ल सिर्फ़ दुनिया के नफ़ा-नुक़सान तक महदूद है:

  • नीयत पर जज़ा: अल्लाह तआला दिलों के भेदों और नीयतों को ख़ूब जानता है। कौन सच्चे दिल से हिदायत का तालिब है और कौन सरकश व मुनकिर है, सबका बदला अल्लाह के इल्म के मुताबिक़ दिया जाएगा।

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