कुरान - 53:31 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
وَلِلَّهِ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِ لِيَجۡزِيَ ٱلَّذِينَ أَسَـٰٓـُٔواْ بِمَا عَمِلُواْ وَيَجۡزِيَ ٱلَّذِينَ أَحۡسَنُواْ بِٱلۡحُسۡنَى

Transliteration: (Wa lillaahi maa fis samaawaati wa maa fil ardi liyajziyal lazeena asaaa'oo bimaa 'amiloo wa yajziyal lazeena ahsanoo bilhusnaa)

और अल्लाह ही का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है, ताकि वह बुराई करने वालों को उनके किए का बदला दे [36] और नेकी करने वालों को बेहतरीन जज़ा (जन्नत) अता फ़रमाए [37]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 31

"और अल्लाह ही का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है, ताकि वह बुराई करने वालों को उनके किए का बदला दे [36] और नेकी करने वालों को बेहतरीन जज़ा (जन्नत) अता फ़रमाए [37]!"


[36] बद-आमालियों और ख़राब अक़ीदों की सज़ा

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'असा-ऊ' से मुराद जिस्मानी गुनाह भी हैं और अक़ीदे का बिगाड़ भी। अल्लाह तआला इंसाफ़ के साथ गुनाहगारों और मुनकिरों को उनकी बुराई की सज़ा देगा।

[37] नेकोकारों के लिए हुस्ना (जन्नत व दीदार-ए-इलाही)

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'अल-हुस्ना' से मुराद जन्नत, रब्बानी नेअमतें और सबसे बढ़कर दीदार-ए-इलाही और हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ का कुर्ब व शफ़ाअत है जो नेक बंदों को अता होगी।

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