कुरान - 53:28 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
وَمَا لَهُم بِهِۦ مِنۡ عِلۡمٍۖ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّۖ وَإِنَّ ٱلظَّنَّ لَا يُغۡنِي مِنَ ٱلۡحَقِّ شَيۡـٔٗا

Transliteration: (Wa maa lahum bihee min 'ilmin iny yattabi'oona illaz zanna wa innaz zanna laa yughnee minal haqqi shai'aa)

हालाँकि उन्हें इसका कुछ भी इल्म नहीं; वे सिर्फ़ गुमान (अटकल) की पैरवी करते हैं, और बेशक गुमान हक़ के मुक़ाबले में कुछ भी काम नहीं देता [32]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 28

"हालाँकि उन्हें इसका कुछ भी इल्म नहीं; वे सिर्फ़ गुमान (अटकल) की पैरवी करते हैं, और बेशक गुमान हक़ के मुक़ाबले में कुछ भी काम नहीं देता [32]!"


[32] अटकल-पच्चू दावों की बे-हक़ीक़ती और क़ियास-ए-शरई

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि दीनी अक़ीदों में गुमान की कोई गुंजाइश नहीं:

  • गुमान बनाम हक़: काफ़िरों के पास अपने अक़ीदों की कोई दलील नहीं, सिर्फ़ अंधे कयास और वहम हैं। इब्लीस ने भी कयास से गुमान करके आदम (अलैहिस्सलाम) को सजदा करने से इंकार किया और हलाक हुआ।
  • शरई क़ियास बरहक़ है: इस आयत से अहले-बिदअत फ़िक़्ही क़ियास का इंकार नहीं कर सकते, क्योंकि शरई क़ियास क़ुरआन व सुन्नत की रोशनी में होता है, जबकि यहाँ मुराद वह बातिल गुमान है जो क़ुरआन व सुन्नत के ख़िलाफ़ हो।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now