कुरान - 53:39 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
وَأَن لَّيۡسَ لِلۡإِنسَٰنِ إِلَّا مَا سَعَىٰ

Transliteration: (Wa al laisa lil insaani illaa maa sa'aa)

और यह कि इंसान के लिए वही है जो उसने कोशिश की [50]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 39

"और यह कि इंसान के लिए वही है जो उसने कोशिश की [50]!"


[50] इंसानी कोशिश और ईसाल-ए-सवाब का शरई मक़ाम

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इस आयत से अहले-सुन्नत का मौक़िफ़ वाज़ेह होता है:

  • अमली ज़िम्मेदारी: इंसान को अपने ही आमाल की जवाबदेही करनी होगी। कोई दूसरा उसके बदले नमाज़ या रोज़ा नहीं रख सकता।
  • ईसाल-ए-सवाब बरहक़ है: नेक आमाल का सवाब दूसरों को पहुँचाना (ईसाल-ए-सवाब) अहादीस-ए-मुबारका से साबित और जाइज़ है। यह आयत काफ़िरों के लिए है कि काफ़िर को किसी के ईसाल-ए-सवाब का कोई फ़ायदा नहीं होगा।

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