कुरान - 53:44 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
وَأَنَّهُۥ هُوَ أَمَاتَ وَأَحۡيَا

Transliteration: (Wa annahoo huwa amaata wa ahyaa)

और यह कि वही मौत देता है और वही ज़िंदा करता है [55]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 44

"और यह कि वही मौत देता है और वही ज़िंदा करता है [55]!"


[55] हयात व ममात का मुतलक़ मालिक

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि ज़िंदगी और मौत सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है:

  • ज़ाहिरी व बात़िनी ज़िंदगी: अल्लाह दुनिया में मौत देकर आख़िरत में दोबारा हयात अता फ़रमाता है। वह औलिया के दिलों को अपने दीदार व मारिफ़त से ज़िंदा रखता है और ग़ाफ़िलों के दिलों को मुर्दनी में मुब्तिला कर देता है।

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