कुरान - 53:43 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
وَأَنَّهُۥ هُوَ أَضۡحَكَ وَأَبۡكَىٰ

Transliteration: (Wa annahoo huwa adhaka wa abkaa)

और यह कि वही हँसाता है और वही रुलाता है [54]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 43

"और यह कि वही हँसाता है और वही रुलाता है [54]!"


[54] ख़ुशी व ग़म और दिलों पर रब का इख़्तियार

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इंसान के जज़्बात और अहसासात पर सिर्फ़ अल्लाह का क़ब्ज़ा है:

  • हँसाना और रुलाना: अल्लाह जिसे चाहे दुनिया में शादमानी दे और जिसे चाहे आज़माइश में डाले। क़यामत के दिन वह अहले-जन्नत को हमेशा के लिए हँसाएगा और दोज़ख़ियों को हमेशा के लिए रुलाएगा। आरिफ़ीन के दिलों को अपने ख़ौफ़ व मुहब्बत में रुलाना भी रब ही की ख़ास अता है।

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