कुरान - 53:55 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

55
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكَ تَتَمَارَىٰ

Transliteration: (Fabi ayyi aalaaa'i Rabbika tatamaaraa)

तो (ऐ सुनने वाले!) तू अपने रब की किन-किन नेअमतों पर झगड़ेगा (या झुठलाएगा) [66]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 55 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 55

"तो (ऐ सुनने वाले!) तू अपने रब की किन-किन नेअमतों पर झगड़ेगा (या झुठलाएगा) [66]?"


[66] अहले-ईमान को रब्बानी एहसानात की याद-दहानी

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने मोमिनीन से ख़िताब फ़रमाया कि हमने पिछले जालिमों को तबाह किया और तुम्हें अपने महबूब मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की ग़ुलामी और दीन की नेअमत से सरफ़राज़ फ़रमाया। अब तुम अपने रब के किन एहसानात का इंकार कर सकते हो!

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