Transliteration: (Azifatil aazifah)
"पास आ गई वह पास आने वाली (क़यामत की घड़ी) [68]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि हुज़ूर ख़ातमुन-नबिय्यीन ﷺ की तशरीफ़-आवरी और क़ुरआन के नुज़ूल के बाद अब क़यामत बिल्कुल सर पर आ चुकी है, अब सिर्फ़ हश्र के ऐलान का इंतिज़ार है।
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