Transliteration: (Afamin hazal hadeesi ta'jaboon)
"तो क्या तुम इस कलाम (क़ुरआन) पर तअज्जुब करते हो [70]?"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि काफ़िर क़ुरआन की सच्चाई और एक इंसान के नबी बनने पर तअज्जुब करते थे। यह तअज्जुब कोई सादा हैरानी नहीं बल्कि इंकार और कुफ़्र का इज़हार था।
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